व्याभिचारी संतो का व्याभिचार ,धर्म जगत शर्मशार,आस्था पर प्रहार

विशेष आलेख/ डी एन योगी

देश में इस समय फ़र्जी साधू संतो की बाढ़ सी आ गई है | अपने काले कारनामो के चलते धर्म अध्यात्म को कलंकित करने वाले इन व्याभिचारी व ढोंगी संतो को कानून के तहत कार्यवाही भी हो रही है| ऐसे ही संत समाज में गलत सन्देश दे रहे है , प्रस्तुत है ऐसे ही स्वनामधन्य फ़र्जी संतो  पर एक विशेष आलेख : 

साधू संत और महात्मा देश व समाज के लिए वरदान होते है , साधू संत समाज को  मार्गदर्शन प्रदान करते हैं परंतु कुछ स्वनामधन्य ढोंगी संत-महात्मा और फ़र्जी बाबा लोग इसके विपरीत आचरण करके असली संत-महात्माओं की बदनामी व कुयश का कारण बन रहे हैं।

ऐसे कलंकित संतो में आसाराम बापू, फलाहारी बाबा, गुरमीत राम रहीम सिंह और जैन संत आचार्य शांति सागर आदि को कथित रूप से यौन शोषण एवं अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया। संत रामपाल पर भी अनेक आरोप हैं। अभी भी यह सिलसिला थमा नहीं है व ऐसी नवीनतम घटनाओं में उत्तर प्रदेश में बस्ती के संत कुटीर आश्रम के 4 महंतों बाबा स्वामी सच्चिदानंद, परम चेतनानंद, विश्वासानंद और ज्ञान वैराग्यानंद द्वारा 4 साध्वियों को बंधक बनाकर उनसे मारपीट तथा सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पीड़ितों के अनुसार दुष्कर्म का विरोध करने वाली लड़कियों को रस्सी से बांध कर यातनाएं दी जाती थीं। यमुनानगर स्थित एक मंदिर में माथा टेकने गई छठी कक्षा की छात्रा से छेड़छाड़ करने के आरोप में 70 वर्षीय पुजारी गया प्रसाद गिरि पर केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया गया। इसी प्रकार सिंगापुर की एक अदालत ने महिलाओं के अश्लील वीडियो बनाने पर एक पादरी को 8 सप्ताह की जेल की सजा सुनाई। अदालत को बताया गया कि उसके पास विभिन्न महिलाओं की 127 अश्लील फिल्में हैं। इन दिनों नई दिल्ली में विजय विहार स्थित एक ‘आध्यात्मिक विश्वविद्यालय’ चर्चा में है जहां पुलिस ने एक सैक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया और तीसरे दिन की छापेमारी के बाद महिला आयोग और पुलिस टीम ने बंधक बनाकर रखी गई 41 नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला। बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में अभी भी 100 से अधिक लड़कियां तथा महिलाएं हैं जिन्होंने बाहर आने से इंकार कर दिया है जबकि वीरेंद्र देव दीक्षित अभी फरार है।

 

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर गठित स्पैशल टीम जिसमें दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी शामिल थीं, ने वहां छापा मारा था तथा 21 दिसम्बर सुबह फिर वहां छापेमारी करने पहुंची। इस दौरान वहां के लोगों से चाबियां मांगी गईं लेकिन उन्होंने मना कर दिया। आखिर पुलिस ने एक-एक करके करीब 14 दरवाजों के ताले तोड़े और यहां से 41 नाबालिग लड़कियों को बाहर निकाला। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यहां महिलाओं का शारीरिक तथा मानसिक शोषण होता था। कमरों में से कई प्रतिबंधित दवाइयां और आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद की गईं। ‘विश्वविद्यालय’ के अनुयायियों का कहना है कि बाबा वीरेंद्र दीक्षित शरण में आने वालों को अध्यात्म का ज्ञान दिया करता था।

 

खास बात यह है कि आश्रम के सभी दरवाजे हमेशा बंद ही रहते हैं। छापेमारी के दौरान 2 लोगों को हिरासत में लिया गया। कुछ पीड़ित परिवार वालों की शिकायत पर यह छापेमारी की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि बाबा वीरेंद्र देव यहां बच्चियों का यौन शोषण कर रहा है। इससे पूर्व 20 दिसम्बर को इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान स्पैशल टीम ने यहां की गई रेड की रिपोर्ट सौंपी। पैनल ने अदालत को बताया कि जांच के लिए जब वे 19 दिसम्बर को वहां गए तो कुछ कर्मचारियों ने उनसे मारपीट की और लगभग एक घंटे तक बंधक बनाए रखा। अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 दिसम्बर को सी.बी.आई. को इसके संस्थापक बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित का पता लगाकर 4 जनवरी से पहले उसके सामने पेश करने का आदेश दिया है।

 

हालांकि सभी संत ऐसे नहीं हैं परंतु निश्चय ही ऐसी घटनाएं संत समाज की बदनामी का कारण बन रही हैं लेकिन इसके लिए कुछ सीमा तक महिलाएं भी दोषी हैं जो इन स्वनामधन्य बाबाओं से प्रभावित होकर इनके झांसे में आ जाती हैं और अपना सर्वस्व लुटा बैठती हैं। लिहाजा इस मामले में महिलाओं को भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

ऐसी कुरीतियों को दूर करने के लिए चर्च ने भी पहल की है। जहां पोप फ्रांसिस ने 12 जून, 2013 को वैटिकन में गे समर्थक लाबी की मौजूदगी को स्वीकार करते हुए इसकी ङ्क्षनदा की वहीं 5 मार्च, 2014 को अमरीका में मैरोनाइट कैथोलिक गिरजाघर में एक शादीशुदा व्यक्ति को पादरी बनाकर नई पहल की गई। आशा है कि समय के साथ इस सिलसिले में तेजी आएगी तथा महिलाएं भी इस मामले में और चौकस होंगी।

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