संत कुटीर आश्रम में दुष्कर्म का भंडाफोड़ करने वाली चार युवतियों में दो छत्तीसगढ़ की, पढ़िए पूरी कहानी

जांजगीर  : उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले में स्थित संत कुटीर आश्रम में अय्याश संत सच्चिदानंद उर्फ दयानंद के करतूत का भंडाफोड़ करने वाली चार युवतियों में से दो युवतिया छत्तीसगढ़ की है । पीडिता युवती के पिता ने मिडिया से चर्चा में बताया की बाबा एक सत्संग में मिला और 13 साल की बेटी को साथ ले जाने और उसे उच्चकोटि की शिक्षा देकर कथावाचक बनाने की बात की। बाबा ने बाद में आकर एक शपथ-पत्र भी भरवाया था।

इस संबंध में  यूपी के बस्ती जिले में स्थित सच्चिदानंद उर्फ दयानंद के आश्रम में दुष्कर्म और मारपीट के बाद मामला दर्ज कराने वाले जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा और हसौद थाना क्षेत्र की दो किशोरियों ने व्याभिचारी बाबा की करतूत सबके सामने किया।उक्त दोनों युवतियां साध्वी बनने आश्रम में गई थीं। 

एक पीड़ित युवती  का पिता बेटी को तो वहां से लाया ही साथ ही दूसरी पीड़िता को भी आजाद कराया । आश्रम के दरिंदो ने  साध्वी बनने आई इन युवतियों के साथ मारपीट भी की थी। दोनों का इलाज चल रहा है। जांजगीर एसपी अजय यादव के अनुसार आश्रम के महंत समेत 4 संतों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया है।

इस संबंध में मिडिया में पीडिता के पिता की जुबानी जो कहानी सामने आई है उसके अनुसार वर्ष 2008 में महंत सच्चिदानंद उर्फ दयानंद का गांव में एक सप्ताह तक सत्संग हुआ था। मैं भी पीडिता युवती का पिता  परिवार समेत प्रवचन सुनने गया। पीडिता के पिता ने बताया कि वह दामाद के यहां रुका था। उसकी दूसरी  बेटी जिसकी उम्र तब करीब 13 वर्ष थी, उसे देख सच्चिदानंद ने कहा- हम तुम्हारी बेटी को साथ ले जाएंगे | उसे धर्म और आध्यात्म की शिक्षा देकर कथावाचक बनाएंगे। क्षेत्र के करीब 10 लड़के-लड़कियां आश्रम जा रहे थे, पीड़िता के पिता ने भी अपनी पुत्री को भेज दिया ,वर्ष 2009 में बेटी सच्चिदानंद के साथ वापस आई। इस दौरान सच्चिदानंद ने जैजैपुर की तहसील में मुझसे एक शपथ-पत्र भरवाया, उसमें लिखा था- मैं बेटी को साध्वी बनाने के लिए आश्रम को सौंप रहा हूं। इसके बाद बेटी कभी वापस नहीं आई।

इसके पश्चात् 14 दिसंबर को संत कुटीर आश्रम से फोन आया कि बेटी की तबीयत खराब है उसे ले जाऊं। मैं लेने पहुंचा तो बेटी और एक और पीड़ित गंभीर हालत में आश्रम में पड़ी हुई थीं।आश्रम के लोगों ने दोनों से मारपीट भी की थी। इसके वहां मैंने एक और दूसरी पीड़ित के साथ किसी तरह अपनी बेटी को बस्ती के जिला अस्पताल पहुंचा और वहां इलाज के लिए भर्ती कराकर वापस आ गया। बेटी की सेहत में सुधार होने के बाद उसे लेकर आऊंगा। 

 एएसपी पंकज चंद्रा के अनुसार दूसरी पीड़ित के पिता ने बयान में बताया है कि बेटी वर्ष 2012 में चाचा के साथ संत कुटीर आश्रम गई थी, तब उसकी उम्र करीब 16 साल थी। पहले से आश्रम में रह रही क्षेत्र की पीड़ित किशोरी के संपर्क में आकर उसने भी साध्वी बनकर आश्रम में रहने का मन बना लिया। उसके परिजन से भी आश्रम के महंत ने साध्वी बनने के लिए स्वेच्छा से आश्रम को सौंपने का शपथ पत्र भरवाया। इसके बाद वह कभी अपने घर नहीं आई।

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