गांधी राष्ट्रपिता नही, आदिवासी हिन्दु नही, सरकार में राम मंदिर बनाने की नियत नही : शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती

कवर्धा : कवर्धा पहुंचे द्वारिका ज्योतिषपीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने आदिवासियो को हिन्दु मानने से इंकार करते हुए कहा कि आदिवासी हिन्दु नही हैं वे स्वयं को हिन्दु मानते भी नही, उन्होने कहा कि हिन्दु धर्मान्तरण नही करते जबकि आदिवासी धर्मान्तरण कर रहे है। उन्होने राम मंदिर मुद्दे को लेकर कहा कि कोई भी राजनीतिक संगठन नहीं चाहता कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बने, वे तो बस हिंदू और मुसलमानों को अलग कर सत्ता में आने की राजनीति करना चाहते हैं।

विश्व हिंदू परिषद पर लगाया भ्रम पैदा करने का आरोप

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का कहना हैं कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) लोगों में भ्रम पैदा कर रहा है। विहिप कहता है कि श्रीराम जन्मभूमि में मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी, जबकि ऐसा नहीं है, वहां कभी कोई मस्जिद थी ही नहीं। उन्होंने बताया कि जब कार सेवकों ने ढांचा तोड़ा था, तो हमने देखा कि वहां 14 कसौटी के खंभे थे। उन खंभों में मंगल कलश थे। हनुमान जी का चित्र था। मस्जिद का कोई नामों-निशान नहीं था। हमारे वकील ने कोर्ट में यह सिद्ध किया कि बाबर कभी अयोध्या आया नहीं, तो अयोध्या में बाबरी मस्जिद का अस्तित्व कैसे हो सकता है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदुओं की परिभाषा बदल दी। उनका कहना है कि जो हिंदुस्तान में हैं वे हिंदू हैं। शंकराचार्य स्वामी करपात्रीजी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हिंदू वे हैं, जो वेदों को मानते हैं। वहीं मनु के हिसाब से चलने वाले मानव कहलाता है। उन्होंने ये भी कहा कि गांधी को राष्ट्रपिता कहना गलत है, क्योंकि राष्ट्र उनसे पहले भी था, उनके बाद भी है। वस्तुत: वे राष्ट्र भक्त थे।

अयोध्या में राम मंदिर बनवाने नियत नही रखती सरकार

उन्होंने कहा कि भाजपा हो, कांग्रेस या अन्य कोई भी राजनीतिक दल श्रीराम जन्मभूमि के विषय को ठीक से नहीं उठा रहे हैं। वास्तव में सरकार के पास अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनवाने का अधिकार है और न ही नीयत। क्योंकि सत्ता में आने के बाद सरकार धर्म निरपेक्ष हो जाती हैं। देश का संविधान उन्हें इस बात की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनेगा ये तय है। मंदिर का निर्माण धर्माचार्य ही कराएंगे।

स्कूल में दिया जाये बच्चों को गीता और रामायण की शिक्षा

एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि संस्कृति की रक्षा नहीं कर पाने को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चों को गीता और रामायण की शिक्षा दी जानी चाहिए। धर्म का ज्ञान देना चाहिए। धर्म का ज्ञान होने से बचपने में ही मन पवित्र रहेगा और अपराध वगैरह से दूर रहेंगे।

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