छत्तीसगढ़ में 12लाख दिव्यांगों के लिए मात्र 160 शिक्षक,क्या यही 15सालो की सरकार का विकास

1.छत्तीसगढ़ राज्य के 27 जिलों में 12 लाख दिव्यांगों हेतु मात्र 160 शिक्षक कैसे होगी दिव्यांगों की शिक्षा दीक्षा। 

२. वर्ष 2012 से बंद है दिव्यांगों के शिक्षकों भर्ती 

3 . rci नई दिल्ली की नियमावली में 8 बच्चो के लिए 1 विशेष शिक्षक की नियम 

4. दिव्यांगों के लिए आखिर फंड का उपयोग क्यों नहीं?

5. इस बार इस विषय पर घोषणा पत्र में किस पार्टी की होगी यह दिव्यांगों का और विशेष शिक्षक संघ का  मुख्य मुद्दा 

6. प्रदेश के सभी संघ के सदस्य और दिव्यांगों से इस विषय पर बदल सकती है चुनावी माहौल। 

रायपुर:-[कबीर क्रांति ] वर्तमान बजट में 2 करोड़ में दिव्यांग कालेज शुरू की जा रही हैं। मगर दिव्यांगों के लिए शिक्षक की भर्ती सरकार नही कर रही हैं। वर्तमान में 180 विशेष शिक्षक/ बी आर पी राजीव गांधी शिक्षा मिशन में कार्यरत हैं। इतनी ज्यादा संख्या में ग्रामीण और शहरी परिवेश में विकलांग बच्चे हैं उनकी शिक्षा के लिए राज्य सरकार चिंतित नही हैं। जब इन दिव्यांग बच्चों की प्रायमरी और हाई स्कुल शिक्षा होगी ही नही तो वो रायपुर में बनने वाली करोडो की कालेज में पहुचेंगे कैसे। गरीब तबके के परिवार सरकारी स्कुल से ही अपने दिव्यांग बच्चों की शिक्षा करवाते हैं किन्तु प्रशिक्षित शिक्षको की कमी के कारण दिव्यांग बच्चों की शिक्षा नही हो पा रही हैं। 
एक ब्लाक में मात्र 1 विशेष शिक्षक से क्या संभव हैं दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास।
सामान्य बच्चों के लिए 40 बच्चों के लिए 1 शिक्षक हैं जबकि 1 ब्लाक में 1 विशेष शिक्षक वो भी पुरे ब्लाक के दिव्यांगों के लिए तो 1 शिक्षक 1 ब्लाक में किस तरह और कितने स्कुल में जाकर शिक्षा दे पायेगा। 
आमिर परिवार तो अपने दिव्यांग बच्चों को कोई भी परिवेट स्कुल में पढ़ा सकते हैं किन्तु गरीब परिवार को सरकार कोई व्यवस्था नही की इनकी शिक्षा हेतु।जबकि सीबीएसई स्कुलो को नई दिल्ली सीबीएसई का निर्देश हैं की स्पेशल एडुकेटर भर्ती करे राज्य के एक भी सीबीएसई स्कुल इस नियम का पालन नही कर रही हैं।भारत जैसे देश में दिव्यांगों की संख्या 3 करोड़ हैं, छत्तीसगढ़ में 624937 दिव्यांग हैं, राज्य मे दिव्यांगता क्षेत्र के लिए राजीव गांधी शिक्षा मिशन, समाज कल्याण विभाग और स्वस्थ विभाग एवम् आंगनबाड़ी के माध्यम से कार्य किया जा रहा हैं। 


वास्तविक में राज्य में समाज कल्याण विभाग का 8 स्कुल संचालित हैं जो की दैनिक वेतन भोगी के विशेष शिक्षको के साथ स्कुल संचालित हैं इस स्कुल में 6 से 18 वर्ष के सभी प्रकार के दिव्यांग बच्चों के स्कुल हैं। लेकिन समाज कल्याण विभाग ने 8 स्कुल में ही वाहां वाही बटोर रखी हैं। 2013 में समाज कल्याण विभाग ने राज्य भर से विशेष शिक्षक  और फीजिओथेरपिस्ट की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था किन्तु विभाग ने इस भर्ती को रद्द कर दिया। अब विभाग 8 स्कुल, विकलांगता प्रमाण पत्र, उपकरण वितरण, स्कॉलरशिप तक ही सिमित हैं। जिससे विकलांग बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास में असफल कह सकते हैं।


आंगनबाड़ी में सिर्फ दलिया भात और उनकी संख्या बनाकर भेजने का काम हैं क्यों की आंगनबाड़ी में कोई भी प्रोफेसनल दिव्यांगता के क्षेत्र में है ही नही। इसे सिर्फ खानापूर्ति कह सकते हैं। 2 से 4 वर्ष के बच्चों का दायित्व हैं।
स्वास्थ विभाग में सिर्फ प्रमाण पत्र , नार्मल चेकउप और दवाई तक कही कही पर सर्जरी का कार्य किया जा रहा हैं।
राजीव गांधी शिक्षा मिशन इसमें राज्य में 186 विशेष शिक्षक की सूचि तो रखी हैं मगर कार्यरत मात्र 160 विशष शिक्षक ही हैं। इनके पास तो ब्लॉक में मात्र रिसोर्स सेंटर बनाकर शिक्षा, पुनर्वास का काम किया जा रहा हैं। 2011 12 में 675 पोस्ट शिक्षा मंत्रालय दुवरा दिया गया था किन्तु मात्र 100 पोस्ट में भर्ती लिया गया और 575 पदो की बजट को गलत उपयोग कर रही हैं राजीव गांधी शिक्षा मिशन रायपुर।


मिशन ने इतने वर्षो में मात्र 160 लोगो से पुरे 150  ब्लॉकों में शिक्षा और पुनर्वास को विजय प्राप्त करने का बीड़ा उठाया हैं जो की दिव्यांगों से मजाक हैं। 6 से 14 वर्ष की बच्चों पर कार्य कर रही हैं।
विगत वर्षो में मात्र 160 लोगो को ही नोकरी दिया गया हैं।
सीबीएसई स्कुलो में तो 2 विशेष शिक्षक अनिवार्य किया गया हैं फिर भी छत्तीसगढ़ राज्य में एक भी स्कुल इस नियम का पालन नही कर रहा हैं। और न ही राज्य सरकार इस नियम को कड़ाई से लागू करव पा रही हैं।
राज्य में इतने सारे दिव्यांग बच्चे हैं जिनको शिक्षा की जरूरत हैं। पुनर्वास की जरूरत हैं।
फिजियोथेरफिस्ट की जरूरत हैं।
उपकरण की जरूरत हैं ।
प्रमाण पत्र की जरूरत हैं।
लेकिन इतने सारे विभागों में गंभीर कोई नही हैं।
भारत में विकलांगता किसे कहते हैं
Pwd एक्ट 1995 में 
1 मानसिक विकलांगता
2 शारीरिक विकलांगता
3 मूक बधिर
4 दृष्टि बधिरता
5 आंशिक अंधापन
6 मानसिक बीमारी
7 कुष्ठ रोग
को विकलांगता की श्रेणी में रखा गया हैं।
नेशनल ट्रस्ट एक्ट 1999 में 
1स्वलीनता
2 मानसिक मंदता
3 प्रमस्तिष्क पक्षाघात
4 बहुविक्लांगता
इन 4 को रखा गया हैं।
2016 में 21 प्रकार की विकलांगता को मान्यता मिली हैं जो 
1. Blindness
2. Low-vision
3. Leprosy Cured persons
4. Hearing Impairment (deaf and hard of hearing)
5. Locomotor Disability
6. Dwarfism
7. Intellectual Disability
8. Mental Illness
9. Autism Spectrum Disorder
10. Cerebral Palsy
11. Muscular Dystrophy
12. Chronic Neurological conditions
13. Specific Learning Disabilities
14. Multiple Sclerosis
15. Speech and Language disability
16. Thalassemia
17. Hemophilia
18. Sickle Cell disease
19. Multiple Disabilities
20. Acid Attack victim
21. Parkinson’s disease
इनकी शिक्षा के लिए भारतीय पुनर्वास परिषद् से मान्यता प्राप्त संस्था से डी एड, बी एड, एम् एड,   और 2 वर्षीय पाठक्रम को मान्यता दिया गया हैं। वो भी बिना स्कालरशिप की कोर्सेस हैं।
इसमें विकलांग बच्चों को शिक्षा पुनर्वास , व्यायाम और दैनिक जीवन को समाज और उनके स्वरोजगार हेतु जोड़ने में विशेष शिक्षक ही मुख्य हैं।
छत्तीसगढ़ में प्रायास भिलाई श्रवनबधित में, अंकुर कोरबा सेरब्रल पाल्सी में, आकांछा रायपुर मानसिक मंदता में कोर्स करवा रही हैं।


सवाल यह हैं की इतनी सब कुछ होने के बाद भी हमारे राज्य में पुनर्वास केंद्र 8 हैं।
309712 विकलांगो को प्रमाण पात्र दिया गया हैं।
इनके 160 शिक्षक हैं जो की 624937 लोगो को कैसे शिक्षा देंगे।
इसमें राज्य सरकर और विभाग की लाफरवाहि हैं की दिव्यंगत के लिए सफेद हाथी और अलदीन का चिराग घिसकर ही केंद्र से बजट मंगवाकर गलत उपयोग किया जा रहा हैं।
राज्य में एकमात्र crc सेंटर जहां विकलांगो के लिये सहायक उपकरण बनता था उसे भी बन्द कर दिया गया हैं।
समाज में शिक्षा ही महत्वपूर्ण हैं किसी भी व्यक्ति के लिए लेकिन दिव्यांगों को वो भी नसीब नही हैं जो की काफी दुखद हैं।
दिल्ली जैसे राज्य में प्रति स्कुल 2 विशेष शिक्षक अनिवार्य हैं तो बाकि राज्य में क्यों नही।
इस गंभीरता को छत्तीसगढ़ राज्य में लागु क्यों नही किया जा रहा हैं।

प्रदेश अध्यक्ष विशेष शिक्षक संघ
सुनील साहू 

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